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मन पखेरू
मैं हूँ जमीन बंजर, मुझे क्या कोई परवाह, घटा छाए तो क्या, धूप आये तो क्या ?श्रेणी
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Category Archives: युवा क्रांति
बता तुझको हुआ क्या है ?
ए अमरवीर , ए भरतपुत्र बता तुझको हुआ क्या है ? परिस्थितियों का दास बनकर, खो दिया उल्लास तुमने, अपने बाजुओं की ताकतों का क्या किया कभी आभास तुमने ? मत रो कि तुम वीरपुत्र हो, उठ खड़े हो – … Continue reading
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1 टिप्पणी
कड़ी
कड़ी जो जोड़ती है- कर्तव्य को अधिकार से, वाणी को व्यवहार से, सादगी को श्रृंगार से, नफ़रत को प्यार से । कड़ी जो जोड़ती है – अमीर को फ़कीर से, आत्मा को शरीर से, प्रसन्नता को पीर से, जोशीलेपन को … Continue reading
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विचार-क्रांति अभियान
यों कोसने परिस्थिति को, सौ बहाने हमने पाए हैं, किंतु जूझने को अंधकार से, कितने कदम हमने उठाए हैं ? ——————————————————————— कहने को हर कोई कहता, राष्ट्र दुर्बल, अविकसित, अनुशासनहीन है, पर अपने को क्या वास्ता, अपनी दुनिया तो रंगीन … Continue reading
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आह्वान
युवा, जिसका चिंतन कभी वृद्ध नहीं हुआ । जिसे विश्वास है अपने-आप पर । जिसमें उमंग है, साहस है, जोश है, कुछ कर-गुजरने का । जो सक्षम है, हवाओं का रूख मोड़ने में । युवा, जिसे भय नहीं, कितना भी … Continue reading
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