Category Archives: यादें

कुछ खूबसूरत यादें

भुलाये नहीं भूलते, कुछ खूबसूरत यादें कुछ मीठे कुछ रसीले, अनुभव की वो बातें याद है तोतली बोली से, हम बड़ों को लुभाते थे और छूकर कभी मामा की दाढ़ी, हम बहुत घबराते थे खो गया कहाँ जाने बचपन, वक़्त की गहराइयों … Continue reading

Posted in यादें | Tagged , , , , , | 2s टिप्पणियाँ

कुछ यादें, कुछ सपने

झंकृत हो रही अंतर्वीणा, फिर क्यों यह कंठ अवरुद्ध है ? नव संकल्प का उल्लास है, पर फिर भी मन क्यों क्षुब्ध है ? आज बुहारा जब यादों का आँगन, कुछ स्वप्न उनमे भी पड़े थे | कैसे तोड़ दूँ  … Continue reading

Posted in यादें | Tagged , , , , , , , , , , , , , | 1 टिप्पणी

‘आलू का भरता’

वो ‘एकमात्र’ विद्यालयजब माँ दिया करती थी टिफिनकि खा लेना जब मध्यावकाश हो | ‘एकमात्र’ क्योंकिकभी फिर ऐसा संजोग ही नहीं बनाकि जब मेरा विद्यालय घर से दूर हो,या माँ मेरे पास हो,या फिर मैं इतना छोटा होऊंकि ‘भूख’ बर्दास्त … Continue reading

Posted in यादें | Tagged , , , , , , , , , , , , , , , , , , | 1 टिप्पणी

वो आई और चली गयी

एक हवा का झोंका आया कहते हैं ‘नया’ संदेशा लाया ? पर जब भी देखा, पाया मैंने पुरवाई पश्चिम की ही गली गयी वो आई और चली गयी | बाज़ार बढ़ गए नए मशीनों के, किसे फिक्र इंसानी करीनों के … Continue reading

Posted in देश-काल, यादें | Tagged , , , , , , , , , , , , , , , , , | 3s टिप्पणियाँ

विसर्जन

मुझे आज भी याद है अच्छी तरहबालकोनी पर खड़ा मैंअपनी माँ का आँचल पकड़ेऔर निचे सड़क परएक लम्बी सी रेंगती कतारजोर-२ से चिल्लाते हुए -“नमो नमस्ते, जगदम्बे भसते”और पीछे माँ दुर्गे की विलक्षण प्रतिमादस कन्धों पर विराजमान | माँ ने … Continue reading

Posted in यादें, रिश्ते, वेदना | Tagged , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , | 1 टिप्पणी

साक्षी

परछाई ,तू साक्षी हैउस निर्मम धूप कीजिसकी उष्मा मेंमेरा स्वप्न झुलस कर रह गया मैं लेटा थाजिन अपनों की छतरी के निचेबेसुध,वे धूप कड़ी होते हीसमेट लिए गए,और मैं पड़ा रहा आँखें तब खुलींजब घुटता हुआ पायाअपनी आत्मा को,अपने सपनों … Continue reading

Posted in जीवन एक सफ़र, बस यूँ ही, यादें | Tagged , , , , , , , , , , , , | Leave a comment

बंधन

जीवन! अनुभवों की लंबी शृंखला, महसूस करना किसी को अपने हृदय में ; देखना किसी को स्वयं से ही जुड़ा हुआ; सोचना किसी को कभी यूँ ही अचानक ; सीखना किसी से हर पल जीने की अदा ; लड़ना किसी … Continue reading

Posted in जीवन एक सफ़र, यादें | Tagged , , , , , , , , , , , , , | Leave a comment

शहर

इस बार गाँव का सफ़र,कुछ नया सा लगा |सब कुछ बदला हुआ,बिलकुल मेरे बचपन की तरह | अब रसोई में गैस आ गयी है उपले कि जगह,बल्ब आ गये हैं लालटेन कि जगह |क्रिकेट बॉल आ गये हैं कंचों कि … Continue reading

Posted in देश-काल, बस यूँ ही, यादें | Tagged , , , , , , , , , , , , , | Leave a comment

कुछ होली पर……….

माँ की सुन-सुन प्यारी बोली, संग बैठ पूरी बेलने, बचपन की वो मेरी हमजोली, उसपे रंग उड़ेलने, दिल में बसी वो सूरत-भोली, उसको जी-भर छेड़ने, चली है मेरे यादों की टोली, आज होली खेलने |

Posted in यादें, रिश्ते | Tagged , , , , , , , , , , , , , | Leave a comment

खोज

भूल गया इस कदर अपने को कि, घड़ियाँ औफ़िस में ही गुजर गई । साँझ हुई तो पाया, यादें मुझे खोजने मेरे घर गई ।

Posted in बस यूँ ही, यादें | Tagged , , , , , , , , , | Leave a comment