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परिचय
मन पखेरू
मैं हूँ जमीन बंजर, मुझे क्या कोई परवाह, घटा छाए तो क्या, धूप आये तो क्या ?श्रेणी
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प्रतिक्रिया
Nishant on किस्मत Rahul Sharma on सूजन मेरे ‘पैरों’… suneeta on कहो किन ‘सपनों’ से… राजेश 'आर्य' on कहो किन ‘सपनों’ से… pratima dwivedi on कुछ मेरे बारे में -
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Category Archives: यादें
कुछ खूबसूरत यादें
भुलाये नहीं भूलते, कुछ खूबसूरत यादें कुछ मीठे कुछ रसीले, अनुभव की वो बातें याद है तोतली बोली से, हम बड़ों को लुभाते थे और छूकर कभी मामा की दाढ़ी, हम बहुत घबराते थे खो गया कहाँ जाने बचपन, वक़्त की गहराइयों … Continue reading
कुछ यादें, कुछ सपने
झंकृत हो रही अंतर्वीणा, फिर क्यों यह कंठ अवरुद्ध है ? नव संकल्प का उल्लास है, पर फिर भी मन क्यों क्षुब्ध है ? आज बुहारा जब यादों का आँगन, कुछ स्वप्न उनमे भी पड़े थे | कैसे तोड़ दूँ … Continue reading
‘आलू का भरता’
वो ‘एकमात्र’ विद्यालयजब माँ दिया करती थी टिफिनकि खा लेना जब मध्यावकाश हो | ‘एकमात्र’ क्योंकिकभी फिर ऐसा संजोग ही नहीं बनाकि जब मेरा विद्यालय घर से दूर हो,या माँ मेरे पास हो,या फिर मैं इतना छोटा होऊंकि ‘भूख’ बर्दास्त … Continue reading
वो आई और चली गयी
एक हवा का झोंका आया कहते हैं ‘नया’ संदेशा लाया ? पर जब भी देखा, पाया मैंने पुरवाई पश्चिम की ही गली गयी वो आई और चली गयी | बाज़ार बढ़ गए नए मशीनों के, किसे फिक्र इंसानी करीनों के … Continue reading
विसर्जन
मुझे आज भी याद है अच्छी तरहबालकोनी पर खड़ा मैंअपनी माँ का आँचल पकड़ेऔर निचे सड़क परएक लम्बी सी रेंगती कतारजोर-२ से चिल्लाते हुए -“नमो नमस्ते, जगदम्बे भसते”और पीछे माँ दुर्गे की विलक्षण प्रतिमादस कन्धों पर विराजमान | माँ ने … Continue reading
साक्षी
परछाई ,तू साक्षी हैउस निर्मम धूप कीजिसकी उष्मा मेंमेरा स्वप्न झुलस कर रह गया मैं लेटा थाजिन अपनों की छतरी के निचेबेसुध,वे धूप कड़ी होते हीसमेट लिए गए,और मैं पड़ा रहा आँखें तब खुलींजब घुटता हुआ पायाअपनी आत्मा को,अपने सपनों … Continue reading
बंधन
जीवन! अनुभवों की लंबी शृंखला, महसूस करना किसी को अपने हृदय में ; देखना किसी को स्वयं से ही जुड़ा हुआ; सोचना किसी को कभी यूँ ही अचानक ; सीखना किसी से हर पल जीने की अदा ; लड़ना किसी … Continue reading
शहर
इस बार गाँव का सफ़र,कुछ नया सा लगा |सब कुछ बदला हुआ,बिलकुल मेरे बचपन की तरह | अब रसोई में गैस आ गयी है उपले कि जगह,बल्ब आ गये हैं लालटेन कि जगह |क्रिकेट बॉल आ गये हैं कंचों कि … Continue reading
कुछ होली पर……….
माँ की सुन-सुन प्यारी बोली, संग बैठ पूरी बेलने, बचपन की वो मेरी हमजोली, उसपे रंग उड़ेलने, दिल में बसी वो सूरत-भोली, उसको जी-भर छेड़ने, चली है मेरे यादों की टोली, आज होली खेलने |
