Daily Archives: मई 19, 2011

सूजन मेरे ‘पैरों’ में

कोशिश जीवन-पथ पर चलने की और ये सूजन मेरे ‘पैरों’ में, आ जाओ पीड़ा बस जाओ है आँखें खुली अब सहरों में | लम्हे अब कैसे छीनोगे हर सांस को अब मैं जीता हूँ, तुम कहते थे न मैं संगदिल … Continue reading

Posted in कविता, बस यूँ ही, वेदना | Tagged , , , , , , , , , , | 1 टिप्पणी