
हर ऊँचाई को जब मैंने छुआ,
संग कायनात थी |
मेरे जनाज़े पे कोई ना आया,
किस्मत की बात थी |
- राजेश ‘आर्य’
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About राजेश 'आर्य'
समय चला और मैं भी उसके साथ-साथ ।अब पीछे मुड़कर देखता हूँ, तो लगता है कहीं कुछ पीछे छुट गया है, लेकिन क्या? अपनी डायरी टटोलता हूँ, तो उसमें धुंधला-धुंधला सा दिखता है पंक्तियों में गूँथा मेरा अतीत ।उसी अतीत को कुछ खंगालकर बेहतर जीने की कोशिश है यह ब्लोग ।
bahut hi unchi baat kahi hai. Abhi tak ki ye sabse acchi line lagi hai mujhe.
आपकी टिपण्णी के लिए बहुत- २ धन्यवाद अभिषेक जी | कोशिश करूँगा आप सब की अपेक्षाओं पर खरे उतरने की |
nice line…!!