Monthly Archives: मार्च 2011

शिव यह पीड़ा अब नहीं !!

बन गया है नासूर यह, शिव यह पीड़ा अब नहीं | तुम लो रतन, मैं पीयूं हलाहल, यह देव-दानव क्रीडा अब नहीं | भयाक्रांत है हर जीव यहाँ, आतंक से दिल फट रहा | धोखा-धडी बस गया खून में, विश्वास … Continue reading

Posted in कविता, देश-काल, धर्म अध्यात्म | Tagged , , , , , , , , , , , , , | 1 टिप्पणी

क्यों ?

अब पलकें भीगती नहीं, किसी अपने के दूर जाने पर | अपना दायरा बढ़ा है, या कि अपने जज्बात सिमटे हैं ? – राजेश ‘आर्य’

Posted in कविता, जीवन एक सफ़र, रिश्ते | Tagged , , , , , , , , , , , | 2s टिप्पणियाँ

किस्मत

हर ऊँचाई को जब मैंने छुआ, संग कायनात थी | मेरे जनाज़े पे कोई ना आया, किस्मत की बात थी | – राजेश ‘आर्य’

Posted in जीवन एक सफ़र | Tagged , , , , , , | 3s टिप्पणियाँ