क्या कहें
कि तुम्हारा एहसास नहीं हो पाता
जब तक कि सामने ना आ जाओ
याकि एहसास करना नहीं चाहता
क्योंकि साहस नहीं
तुम्हारी बताई राह पर चलने का
क्या कहें
कि मैं भूल गया हूँ कि मैं कौन हूँ
कि तुमने किसलिए चुना है मुझे
कि तुम्हारी पीड़ा मुझे अब परेशान नहीं करती
याकि इन आकांक्षाओं ने लील लिया मेरी भावनाओं को
तुम्हारी प्रेरणाओं को
किस मुँह से कहूँ
तुम्हारे इतने जन्म
तुम्हारा इतना प्यार
तुम्हारा बलिदान भी काफी नहीं
मेरी अंतरात्मा को झिन्झोरने के लिए
मुझे मेरा बोध करने के लिए
क्या कहें,
उन खुश्क भावों से,
जो द्रवित नहीं कर पाती इन आँखों को
याकि उन नपुंसक ‘विचारों’ से,
जो मन में ही रह जाती है,
कर्म में परिणत नहीं हो पाती
क्या कहें
कि वो अपेक्षाएं गलत थी तुम्हारी
कि तुमने जाना नहीं कि कितना कमजोर हूँ मैं
कि यह जिम्मेवारी अब किसी और को दे दो
कि तुम्हारे बच्चे योग्य नहीं
इस सम्मान के |
क्या कहें
कि इस नामवरी के झोंके ने
मुझसे एक ‘स्वयंसेवक’ को छीन लिया
याकि मेरे अहंकार ने
तुमसे एक ‘पुत्र’ को छीन लिया
किस मुँह से जाऊं
तुम्हारे पास
तुम्हे जन्मदिन की बधाई देने
किस भाव से, किस शब्द से ?
दूँ कौन सा उपहार
जो चेहरे पर एक मुस्कान ला सके
यहाँ देने को सिर्फ तुम्हे ‘आंसू’ ही हैं
और इसके सिवा कभी कुछ दिया भी नहीं |
(परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य को उनके आध्यात्मिक जन्मदिवस पर)


Vicharon ki acchi prastuti.
सुंदर…
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